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Apni Jarurat

Apni Jarurat(अपनी जरूरत )

               हर कोई आदमी को किसीना किसी  की चीज  जरूरत तो होती ही हे|अपनी जरुरत होती हे तभी उसी चीज की याद आती है|एक दोस्त को अपनि जरूरत होती है उसी वक्त ही दुशरे दोस्त की  याद आती है|दोस्त की सच्ची दोस्ती हो तो वो हर दिन उसको याद करेगा मगर सच्ची दोस्ती ना हो तो अपनी जरूरत के वक्त ही याद करेगा|
              एक बालक का जन्म होता है तभी धीरे-धीरे बड़ा होता है और उसकी पढ़ाई की जरूरत बादमे पढ़ाई के बाद नौकरी की जरूरत बादमे साडी की जरूरत बादमे परिवार की जरूरत और उसके बाद उम्र हो जाती है तो जिंदगी खतम हो जाती है|
              अपना शेठ  हो वह शेठ  को आदमी जबतक काम करता है वही अच्छा लगता है|वह आदमी कोई दिन बीमार हो जाता हे , कोई दिन कुछ जरूरी काम हो तो काम पर नहीं आ सकता तो वह शेठ उस दिन की टंखा वह शेठ काट लेता है ,और वैसे भी शेठ होते हे की जो मजदूर को काम पर रखते है और उस मजदूर के साथ एक दिन की टंखा नक्की करते हे और उसे नक्की की गया रोज भी नहीं देते है|मगर एसे व्यक्ति (शेठ )भी है जो अपने वह काम करने वाले सभी employee को अपने घर के व्यक्ति की तरह रखने की भावना रखते है |
             वह शेठ लोग एसा मानते है की employee को खुस रखेगे तभी कंपनी को प्रॉफ़िट और हमारी कंपनी अच्छे तरीके से चलेगी |
             इंशान को जरूरत की कीमत तभी मालूम होती है जभी उसके पास जरूरी चीज की कमी हो जाए|अमीर व्यक्ति को गरीबी का क्या पता की गरीबी क्या होती है|मगर अमीर व्यक्ति को गरीब होते समय नहीं लगता|वह गरीब होता है तभी उसे अमीरी की चीजों की कीमत पता चलती है|
            अरे खुसी तो तभी होती है की जभी एक अपंग व्यक्ति उसके पास दो पैर नहीं होते तभी वह olympic जेसी वर्ल्ड tournament मे भाग लेकर gold medal लाता है|क्या उसको जरूरत नहीं होती होगी?एक अपंग व्यक्ति जिसके दो हाथ नहीं होते उसके दो हाथ नहीं होते वह दुनिया का बेस्ट चित्रकार बनता है|क्या उसको जरूरत नहीं होती?
            अमीर व्यक्ति को भी एसा होता है की मेरे पास ये होना चाहिए मेरे पास वो होना चाहिए वह अमीर आदमी के  पास भी इतना कुछ होने के बावजूटभी उसकी जरूरत पूरी नहीं होती|
            इससे अच्छा तो गरीब और middle class व्यक्ति होता है जो जितना उसके पास है उसमे खुस रहता है|वो व्यक्ति को भी जरूरत तो होती है मगर वह आदमी खुस होता है|
           जरूरत की किसीबी आदमी की जरूरत कम नहीं होती|मुजे ये चाहिए मुजे वो चाहिए इसमे ही आदमी लगा रहता है,और उसकी अखी जिंदगी खतम हो जाती है|हर आदमी किसके लिए यह सब करते है,सिर्फ पैसे के लिए सबकुछ करते है|
          कुछ आदमी तो एसेभी होते है की अखी जिंदगी पैसा-पैसा करते है और अखी जिंदगी अपने खुद के लिएभी कोई खर्चा नहीं करते है|क्या फायदा एसी कमाई का की अखी जिंदगी मे कमाते है तो वह पैसा कुछभी काम नहीं आता|
        गरीब आदमी अखा दिन मजूरी करता है,अखा दिन महेनत करता है तभी चंद पैसे बचाकर घर लेके जाता है|और उसके परिवार की जरूरत पूरी करता है|कोई उस गरीब का एसा भी होता है की उसको कोई काम ना मिले तभी भी वह आदमी खुशी खुशी उसके घर जाता है|सलाम तो वह गरीब आदमी को है जो इतनी विपत परिस्थि मे भी परिवार का गुजरान करता है|
       अंत मे यह कहना चाहता हु की किसी को धोका देकर उसके पैसे हड़प कर खुस होते है एसे आदमी को धिक्कार है|एसे आदमी को भगवानभी माफ नहीं करता|किसी की महेनत की लोग चोरी करते है|वह चोरी भी चोरी ही होती है|अपनी जरूरत तब तक होती है जब तक हम कुछ काम कर सकते है और वह काम के लायक है|हम अपनी skill को किसी को दिखाएगे नहीं तब तक किसी को पता नहीं चलेगा की यह क्या कर सकता है(कर सकती है|)|

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